हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित जयन्ती माता मंदिर, धार्मिक आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। जयंती माता को मां दुर्गा की छठी भुजा का एक रूप माना जाता है। कहा जाता है कि कांगड़ा में माता का यह मंदिर द्वापर युग में निर्मित हुआ था। जयंती माता जहां जीत का प्रतीक है वहीं वह पापनाशिनी भी है।
इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत के युद्ध के पश्चात, भगवान श्रीकृष्ण पांडवों को भगवान भीष्म के पास ज्ञान प्राप्त करने के लिए ले गए थे। महाभारत के युद्ध के समय युधिष्ठर को मां जयंती ने स्वप्न दिया था कि उनकी इस युद्ध में जीत होगी और यह भी निर्देश दिया था कि पांडव मां चामुंडा का आशीर्वाद लें। पांच दिनों तक चले इस ज्ञानवर्धन के काल को ‘भीष्म पंचक‘ के नाम से जाना जाता है, जिसे आज भी यहां बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
जयंती मां से जुड़ी कई कथाएं हैं, इनमें से एक कथा यह भी बताई जाती है कि एक राजकुमारी मां की भक्त थी। जब राजकुमारी की शादी हुई और उसकी डोली उठने लगी तो कहार उसे उठा नहीं पाए। इसके बाद राजकुमारी ने कहा कि मां ने उसे स्वप्न दिया था कि वह उसे अपने साथ ले जाए। इसके बाद एक पिंडी को मां की पिंडी के साथ स्पर्श करके राजकुमारी अपने साथ ले गई और उसे अपने सुसराल में स्थापित किया। आज यह स्थान चंडीगढ़ में हैं, जहां जयंती माजरी गांव में मां जयंती का मंदिर बना हुआ, जोकि लोगों की आस्था का प्रतीक है।
कांगड़ा की गोद में शांति का द्वार
जयन्ती माता मंदिर, कांगड़ा की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच स्थित है। मंदिर की अद्भुत वास्तुकला और शांत वातावरण मन को मोहित कर लेता है। पत्थरों से निर्मित यह भव्य मंदिर देवी-देवताओं की मनोहारी मूर्तियों से सुसज्जित है। यहां आकर मन को एक अलौकिक शांति का अनुभव होता है।
पंचभिष्म मेला: आस्था का उत्सव
हर साल यहां आयोजित होने वाला पंचभिष्म मेला देश भर से हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस मेले में भव्य पूजा-अर्चना के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। मेले के दौरान यहां का दृश्य अद्भुत होता है। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं की भीड़ और धार्मिक उत्साह का वातावरण वाकई देखने लायक होता है।
भीष्म पंचक व्रत का महत्व
भीष्म पंचक व्रत को अत्यंत मंगलकारी और पुण्यदायी माना जाता है। यह व्रत पूर्व संचित पाप-कर्मों से मुक्ति प्रदान करता है और कल्याणकारी होता है। जो भी इस व्रत का पालन करता है, वह सदैव स्वस्थ रहता है और उसे प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भीष्म पंचक व्रत करने वालों को पांच दिनों तक संयम और सात्विकता का पालन करते हुए यज्ञादि कर्म करना चाहिए। इस व्रत में गंगा पुत्र भीष्म की तृप्ति के लिए श्राद्ध और तर्पण का भी विधान है।
जयन्ती माता की कृपा पाने के लिए
माना जाता है कि जयन्ती माता की कृपा पाने के लिए यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लोग सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति और अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता से प्रार्थना करते हैं। मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना के साथ-साथ विशेष अवसरों पर हवन, यज्ञ आदि भी आयोजित किए जाते हैं।
यात्रा की योजना बनाते समय
- सर्वश्रेष्ठ समय: मंदिर दर्शन के लिए अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर का समय सबसे आदर्श है। इस दौरान मौसम सुखद और अनुकूल होता है, जिससे यात्रा और दर्शनीय स्थल घूमने में आसानी होती है।
- पहुंचने का तरीका: कांगड़ा शहर से मंदिर लगभग 5 किलोमीटर दूर है। आप बस, टैक्सी या निजी वाहन से यहां पहुंच सकते हैं।
- क्या लाएं: मंदिर में प्रसाद के रूप में फल, मिठाई, फूल आदि ला सकते हैं।
- क्या पहनें: मंदिर में जाने के लिए साफ-सुथरे और ढीले कपड़े पहनें।
आस-पास के दर्शनीय स्थल
जयन्ती माता मंदिर के आस-पास कई अन्य धार्मिक और पर्यटक स्थल हैं। आप अपनी यात्रा में इन स्थानों को भी शामिल कर सकते हैं:
कांगड़ा किला
जयन्ती माता मंदिर के निकट स्थित कांगड़ा किला एक ऐतिहासिक स्थल है जो कांगड़ा की समृद्ध संस्कृति और इतिहास को दर्शाता है। यह किला एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है और यहाँ से पूरे कांगड़ा घाटी का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है।
बृजेश्वरी देवी मंदिर
यह मंदिर कांगड़ा में स्थित एक अन्य प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह देवी बृजेश्वरी को समर्पित है और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक होती है।
नूरपुर किला
नूरपुर किला एक और ऐतिहासिक स्थल है जो कांगड़ा जिले में स्थित है। इस किले की स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व इसे पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाते हैं।
निष्कर्ष
जयन्ती माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि एक शांतिपूर्ण पर्यटन स्थल भी है। यहां आकर आप न केवल माता के दर्शन कर पाएंगे बल्कि हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता का भी लुत्फ उठा सकेंगे। मंदिर का पवित्र वातावरण और मनमोहक दृश्य आपको जीवन भर याद रहेंगे।
जयंती माता मंदिर की गूगल लोकेशन


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